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अपने भविष्य को पत्र
24 अगस्त 2026 प्रिय भविष्य सस्नेह नमस्ते ! वर्तमान के गवाक्ष से तुम्हे देखने की कोशिश कर रही हूँ , तुम अपने हाथों से लगाए परसबाग. में फूल-पत्तियों, हरे-भरे पौधों के बीच आरामकुर्सी पर बैठे अपनी मनपसंद किताब पढ़ रहे हो, मुस्कुरा रहे हो यह देखकर मैं आनंदित हूँ। हूँ। ए.आई. ए. के युग संतुलन रखते हुए अभी भी तुम्हारें हाथ में कलम है अर्थात तुमने अपने विवेक और आनंद की बागडोर अपने हाथ में रखी है। प्रिय भविष्य मुझे तुम पर गर्व है। समय की मांग के अनुसार बदलाव जरूरी है, किंतु संक्रमण काल
