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अपने भविष्य को पत्र

  • Writer: Suman Sharma
    Suman Sharma
  • 3 hours ago
  • 1 min read

24 अगस्त 2026


प्रिय भविष्य


सस्नेह नमस्ते !

वर्तमान के गवाक्ष से तुम्हे देखने की कोशिश कर रही हूँ ,

तुम अपने हाथों से लगाए परसबाग. में फूल-पत्तियों, हरे-भरे पौधों के बीच आरामकुर्सी पर बैठे अपनी मनपसंद किताब पढ़ रहे हो, मुस्कुरा रहे हो यह देखकर मैं आनंदित हूँ। हूँ। ए.आई. ए. के युग संतुलन रखते हुए अभी भी तुम्हारें हाथ में कलम है अर्थात तुमने अपने विवेक और आनंद की बागडोर अपने हाथ में रखी है। प्रिय भविष्य मुझे तुम पर गर्व है। समय की मांग के अनुसार बदलाव जरूरी है, किंतु संक्रमण काल में विवेकपूर्ण निर्णय व बदलाव की दिशा व मात्रा सुनिश्चित करना जरूरी होता है। तुम्हारे रीडिंग कॉर्नर में रखा वह आधुनिक आईपैड जिस पर तुम बड़ी कुशलता से कार्य करते हो, यह दर्शाता है कि तुम्हें अभी भी सीखना अच्छा लगता है। वैसे ही बच्चों की जिज्ञासा, बच्चों जैसी उत्सुकता के साथ सीखना और निरंतर कुछ न कुछ नया सीखना ।

शरीर को बूढ़ा नहीं होने देता। हे प्रिय अनागत, मैं तुमसे एक वचन चाहती ती हूँ अपने वर्तमान की अत्यधिक भाग-दौड़ में मैंने अपने शरीर व मन के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना बड़ी देर से सीखा। तुम स्वास्थ्य को प्राथमिकता को बनाए रखना ।


प्रिय आगामी सुमन मुझे आशा है कि तुम हमेशा यह याद द रखोगी कि अतीत और वर्तमान ने तुम्हारे सुख शांति के लिए ही अथक श्रम व प्रयास किया है इसलिए खुश रहो ! खुशियाँ बाँटो - क्योंकि


जिंदगी हँसने गाने के लिए है पल, दो पल ।


तुम्हारी ही परछाई

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